नई दिल्ली: इंडिगो संकट मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को संज्ञान लिया. चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने इंडिगो पर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्लाइट ड्यूटी लिमिटेशन का पालन सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो द्वारा उठाए जाने वाले उपायों में से एक पर्याप्त संख्या में पायलटों की नियुक्ति होनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा लगता है कि इंडिगो ने समय रहते आवश्यक संख्या में पायलटों की नियुक्ति नहीं किया, जिससे फ्लाइट ड्यूटी लिमिटेशन का अनुपालन सुनिश्चित हो सके.
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और इंडिगो को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या आप इतने असहाय हैं कि एयरलाइंस के खिलाफ कार्रवाई करने से हिचक रहे हैं? हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात बनने ही क्यों दिए गए, जिसमें लाखों यात्री एयरपोर्ट पर बिना सहायता के फंसे रहे. कोर्ट ने याचिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आधी अधूरी तैयारी के साथ याचिका दायर हुई है, लेकिन हम जनहित को देखते हुए इस मामले पर संज्ञान ले रहे हैं. याचिका अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा ने दायर किया है.
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर को इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. . चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि भारत सरकार ने पहले ही इस मामले का संज्ञान ले लिया है. समय पर कार्रवाई की गई है. सरकार को संभालने दीजिए, इस मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है.










