वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान ओवैसी बोले, देशभक्ति को किसी धर्म या निशान से जोड़ना संविधान के नियमों के खिलाफ

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नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि संविधान सोचने और धर्म की पूरी आजादी देता है. देशभक्ति को किसी धर्म या निशान से जोड़ना संविधान के नियमों के खिलाफ है. एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि नागरिकों को किसी भी भगवान के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और नागरिकों से कोई वफादारी सर्टिफिकेट नहीं मांगा जाना चाहिए. वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसका मतलब है ‘माँ, मैं तुम्हें नमन करता हूँ.’

एक्स पर एक पोस्ट में ओवैसी ने वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह पर लोकसभा में खास चर्चा के दौरान अपने भाषण का जिक्र करते हुए लिखा, ‘जब संविधान का पहला पेज ही सोचने, बोलने, विश्वास, धर्म और पूजा की पूरी आजादी देता है तो किसी भी नागरिक को किसी भगवान या देवता की पूजा करने या श्रद्धा से सिर झुकाने के लिए कैसे मजबूर किया जा सकता है?’

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को कहा कि सरकार को मुसलमानों को वंदे मातरम पढ़ने या नारा लगाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए. बोलने, पसंद और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी और सरकार इस पर जोर देती है तो यह संविधान के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ होगा.

ओवैसी ने आगे कहा कि देशभक्ति को किसी एक धर्म या पहचान से जोड़ना संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे सामाजिक बंटवारा बढ़ेगा. उनके अनुसार संविधान की शुरुआत ‘हम लोग’ से होती है, किसी देवी-देवता के नाम से नहीं।

हैदराबाद के सांसद ने कहा कि भारतीय मुसलमान जिन्ना के कट्टर विरोधी हैं. इसीलिए उन्होंने भारत में रहने का फैसला किया लेकिन, उन्होंने कहा कि 1942 में जिन लोगों की इतनी तारीफ की जाती है उनमें से कुछ के राजनीतिक पूर्वजों ने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत, सिंध और बंगाल में जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ मिलकर मिली-जुली सरकारें बनाई.

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Author: News 7

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