गाजीपुर : मुख्तार अंसारी का छोटा बेटा उमर अंसारी मंगलवार शाम कासगंज जेल से रिहा हो गया. उसे 4 अगस्त को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था. 23 अगस्त को कासगंज जेल शिफ्ट किया गया था. करीब 39 दिन जेल में रहने के बाद उसकी रिहाई हुई. इस दौरान जेल परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और रिहाई के वक्त उसके विधायक भाई अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो मौजूद रहीं.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में उमर के खिलाफ 4 अगस्त को मोहम्मदाबाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था. उमर को उसी दिन रात गाजीपुर पुलिस ने लखनऊ विधायक आवास से गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद गाजीपुर लाया गया और पांच अगस्त को पुलिस ने मीडिया के समझ पेश किया और जेल भेज दिया था. परिजनों ने जेल में प्रताड़ना का आरोप लगाया था. इसके चलते उसे 23 अगस्त को गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट किया गया था.
उमर अंसारी पर अपनी मां अफ्शा अंसारी की 10 करोड़ की संपत्ति लेने के लिए फर्जी हस्ताक्षर कर अदालत में दाखिल करने का आरोप है. इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर मुहम्मदाबाद की जूडिशियल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेजा गया था. आरोप है कि उमर अपने परिवार की कुर्क संपत्तियों को बचाने के प्रयास में जालसाजी और कूटरचना का सहारा ले रहा था.
वहीं, उमर अंसारी को पुलिस आईएस-191 गैंग का सक्रिय सदस्य मानती है. गाजीपुर, मऊ और लखनऊ जिलों में उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. जिनमें फर्जी दस्तावेजों से जमीन कब्जाने, चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने और माहौल बिगाड़ने जैसे कई गंभीर आरोप भी हैं. पुलिस का कहना है कि उसकी रिहाई के बावजूद गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और दर्ज मुकदमों की जांचें आगे भी जारी रहेंगी.










