श्रीनगर: भारी बारिश और भूस्खलन के कारण तीन हफ्ते बंद रहने के बाद श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे के फिर से खुलने से कश्मीर के सेब उत्पादकों और व्यापारियों को राहत मिली है. हालांकि, ट्रांसपोर्टर्स ने माल ढुलाई की दरें दोगुनी कर दी हैं जिससे घाटा और बढ़ रहा है. इस बीच, जम्मू-कश्मीर सरकार ने किराया स्थिर करने के लिए सड़क परिवहन निगम के ट्रकों को तैनात करना शुरू कर दिया है, लेकिन किसानों का कहना है कि मांग को पूरा करने के लिए परिवहन निगम के ट्रक पर्याप्त नहीं हैं.
किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि माल ढुलाई की दरों में बढ़ोतरी शोषण से कम नहीं है. शोपियां के एक सेब उत्पादक अब्दुल बारी ने ईटीवी भारत को बताया, “कश्मीर से दिल्ली जाने वाला एक ट्रक अब सेब की एक पेटी के लिए 180-200 रुपये वसूल रहा है. यह बढ़ोतरी नहीं, बल्कि ऐसे मुश्किल हालात में उत्पादकों से जबरन वसूली है. पहले, हमारे सेब हाईवे पर फंसे ट्रकों में सड़ गए. अब, कुल्लू और डिलीशियस जैसी ए-ग्रेड किस्में बागों में फंसी हुई हैं क्योंकि हम किराया नहीं दे सकते.”
भूस्खलन के कारण 26 अगस्त से हाईवे बंद होने से कश्मीर से जम्मू की ओर जा रहे सेब से लदे हजारों ट्रक फंस गए थे, जिससे सेब रास्ते में ही सड़ गए. इस बंद के कारण ट्रकों की कमी हो गई, जिससे ट्रांसपोर्टरो को मनमाने ढंग से किराया दोगुना करने का मौका मिल गया.
विशेष जांच दल गठित
जम्मू-कश्मीर सरकार ने अत्यधिक और अनुचित किराए के बारे में शिकायतें प्राप्त होने के बाद अधिक किराया वसूलने वाले ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया और विशेष जांच दल गठित किए.
सरकार के इन हस्तक्षेपों के बावजूद किसानों का कहना है कि जब तक माल ढुलाई शुल्क कम नहीं होता, कश्मीर के सेब उत्पादकों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी. शोपियां के एक फल व्यापारी इरशाद अहमद ने कहा, “जब ट्रांसपोर्टर इस तरह से वसूली करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हमें सेब उत्पादक होने की सजा मिल रही है. परिवहन की मांग ज्यादा ने के कारण हमें रोजाना 200 ट्रकों की जरूरत होती है. हमें 25 ट्रक उपलब्ध कराए गए हैं. इससे मदद तो मिलेगी, लेकिन माल ढुलाई का शोषण खत्म नहीं होगा.”










