नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया. वकील ने पीठ से मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया. पीठ ने टिप्पणी की, “इसमें जल्दी क्या है? यह मैच है, इसे होने दीजिए. मैच इसी रविवार को है, क्या किया जा सकता है?”
वकील ने पीठ के समक्ष दलील दी कि क्रिकेट मैच रविवार को होना है और अगर मामला शुक्रवार को सूचीबद्ध नहीं हुआ तो याचिका निरर्थक हो जाएगी. हालांकि, पीठ ने कहा, “इस रविवार को मैच है? हम इसमें क्या कर सकते हैं? रहने दीजिए. मैच चलना चाहिए.”
पीठ एशिया कप टी-20 टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी. भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को 2025 एशिया कप का मैच दुबई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में होना है.
याचिकाकर्ताओं ने बीसीसीआई को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के नियंत्रण/क्षेत्राधिकार में लाने के लिए कदम उठाने पर जोर दिया.
उर्वशी जैन के नेतृत्व में चार विधि छात्रों द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि पहलगाम आतंकवादी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच का आयोजन करना राष्ट्रीय गरिमा और जनभावना के विपरीत संदेश है.
याचिका में कहा गया है, “देशों के बीच क्रिकेट का उद्देश्य सद्भाव और मित्रता दिखाना है. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जब हमारे लोग शहीद हुए और हमारे सैनिकों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, पाकिस्तान के साथ खेलने से उल्टा संदेश गया कि जहां हमारे सैनिकों ने अपनी जान कुर्बान की, वहीं हम उसी देश के साथ खेल का जश्न मना रहे हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहा है.”
याचिका में कहा गया है कि इससे पाकिस्तानी आतंकवादियों के हाथों जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिवारों की भावनाएं भी आहत हो सकती हैं और राष्ट्र की गरिमा तथा नागरिकों की सुरक्षा मनोरंजन से पहले आती है.
उन्होंने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेलना यह दर्शाता है कि मनोरंजन और राजस्व सृजन हमारे बहादुर सैनिकों और नागरिकों के जीवन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. यह निर्धारित मैच भारत के सभी नागरिकों की भावनाओं का मज़ाक उड़ाने के अलावा और कुछ नहीं है.”










