फेक न्यूज लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा, मीडिया संस्थानों को रखना होगा फैक्ट चेक मैकेनिज्म: संसदीय समिति की सिफारिश

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नई दिल्ली: संसद की एक समिति ने फेक न्यूज को लेकर बड़ी बात कही है. समिति ने फर्जी न्यूज को सार्वजनिक व्यवस्था और लोकतंत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताया है और इस मुद्दे से निपटने के लिए दंडात्मक प्रावधानों में संशोधन, जुर्माना बढ़ाने और जवाबदेही तय करने की सिफारिश भी की है.

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने मंगलवार को अपनाई गई अपनी मसौदा रिपोर्ट में, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने सभी प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में तथ्य-जांच तंत्र और आंतरिक लोकपाल की अनिवार्य उपस्थिति की भी मांग की है. सूत्रों ने बताया कि समिति ने फर्जी खबरों की चुनौती से निपटने के लिए सरकारी, निजी और स्वतंत्र तथ्य-जांचकर्ताओं सहित सभी हितधारकों के बीच सहयोगात्मक प्रयास सहित कई सुझाव दिए हैं. बता दें, समिति ने रिपोर्ट को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया, जिससे फर्जी खबरों की समस्या से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के प्रति सभी दलों ने अपना समर्थन भी दिया है.

समिति की पेश की गई मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है समिति चाहती है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से यह सुनिश्चित करे कि देश के सभी प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में फैक्ट चेक मेकेनिज्म और आंतरिक लोकपाल को अनिवार्य बनाया जाए. समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी है और संभावना है कि संसद के शीतकालीन सत्र 2025 में इसे पेश किया जाए. मसौदा रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी दी गई है, क्योंकि पैनल इस मंत्रालय की भी जांच करता है.

जानिए समिति की प्रमुख सिफारिशें

  1. संसद की इस समिति ने संपादकीय नियंत्रण के लिए संपादकों और विषय वस्तुओं प्रमुखों तथा संस्थागत विफलताओं के लिए मालिकों और प्रकाशकों को जवाबदेह बनाने की मांग की है.
  2. यह भी कहा गया है कि फेक न्यूज फैलाने के लिए कंपनियों और प्लेटफार्मों को जिम्मेदार मानना होगा.
  3. फेक खबरों के प्रकाशन और वितरण पर लगाम लगाने के लिए मौजूदा अधिनियमों और नियमों में दंडात्मक प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.
  4. हालांकि, समिति ने यह भी कहा कि इसमें मीडिया निकायों और संबंधित हितधारकों के बीच आम सहमति बनाने की प्रक्रिया भी शामिल होनी चाहिए.

भारत को नहीं बनने देंगे बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल
सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक पोस्ट में बीजेपी सांसद ने सत्तारूढ़ गठबंधन को निशाना बनाते हुए एक स्पष्ट रूप से गलत खबर का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें दावा किया गया कि उनकी समिति ने लोकसभा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें इस तरह की गलत सूचना के खिलाफ कड़े कदम उठाने की सिफारिश की गई है. उन्होंने कहा कि दंड और प्रतिबंध सहित सख्त उपायों के लिए किए गए आह्वान में अन्य फर्जी खबरें और महिलाओं और बच्चों के बारे में सामग्री तैयार करने के लिए एआई का दुरुपयोग भी शामिल है. उन्होंने कहा कि हम भारत को बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड जैसा नहीं बनने देंगे. लोगों को गुमराह करने के लिए राष्ट्र-विरोधी ताकतों का एजेंडा चलाने वालों पर अंकुश लगाया जाएगा. कोई भी खबर तथ्यात्मक होनी चाहिए.

फेक न्यूज के खिलाफ बढ़ाई जा सकती है जुर्माना राशि
सूत्रों ने बताया कि मसौदा रिपोर्ट में समिति की इस राय को रेखांकित किया गया है कि फर्जी खबरों के खिलाफ जुर्माने की राशि बढ़ाई जा सकती है ताकि इसे उनके रचनाकारों और प्रकाशकों के लिए निवारक बनाया जा सके. समिति ने कहा कि गलत सूचना और फर्जी खबरों की मौजूदा व्याख्या में अस्पष्टता व्याप्त है और मंत्रालय से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल मीडिया के लिए मौजूदा नियामक तंत्र में उपयुक्त धाराएं शामिल करके इसे परिभाषित कराएं. यह कार्य ‘गलत सूचना से निपटने और संविधान के तहत गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा के बीच नाजुक संतुलन बनाए रखते हुए’ किया जाना चाहिए.

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Author: News 7

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