‘सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन होना चाहिए’ असम बेदखली अभियान पर बोले मौलाना महमूद मदनी

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गुवाहाटी: प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम में सरकार के बेदखली अभियान को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि, इस अभियान में सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए.

मौलाना महमूद मदनी ने असम में सरकार के बेदखली अभियान से प्रभावित हुए लोगों से सोमवार को मुलाकात की. उन्होंने पिछले दिन ग्वालपाड़ा और आसपास के इलाकों में बेदखली से प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद, मंगलवार को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मदनी ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन सैद्धांतिक रूप से बेदखली का विरोध नहीं करता है.

मदनी ने आगे कहा कि, वे बेदखली के खिलाफ नहीं हैं. सरकार को विकास परियोजनाओं, जैसे सड़क चौड़ीकरण या अन्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए जमीन की आवश्यकता हो सकती है. लेकिन सभी बेदखली कानून के मुताबिक, विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार की जानी चाहिए.

मदनी ने ऐसे बेदखली अभियानों से प्रभावित सभी वास्तविक भारतीय नागरिकों के पुनर्वास के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विस्थापित हुए सभी वास्तविक नागरिकों का उचित पुनर्वास हो. उचित प्रक्रिया के बिना किसी को भी बेघर या अपमानित नहीं किया जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना पर क्या बोले मदनी?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कथित तौर पर बेदखली का विरोध करने के लिए की गई आलोचना के बारे में पूछे जाने पर, जमीयत प्रमुख ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा कि, वह सोमवार से असम में हैं. अगर मुख्यमंत्री को लगता है कि उन्होंने कोई कानून तोड़ा है या अशांति फैलाई है, तो उन्हें उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी.

मदनी ने यह भी आरोप लगाया कि बेदखली के कुछ प्रयास निष्पक्ष और कानूनी ढांचे के बजाय घृणास्पद और भेदभावपूर्ण तरीके से किए गए प्रतीत होते हैं.असम सरकार ने हाल के दिनों में खासकर सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण को निशाना बनाकर कई बेदखली अभियान शुरू किए हैं.

उन्होंने कहा कि, इन अभियानों की अक्सर नागरिक समाज समूहों और विपक्षी नेताओं द्वारा आलोचना की जाती रही है, जिनका आरोप है कि ये अभियान अल्पसंख्यक समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और उचित पुनर्वास उपायों के बिना चलाए जाते हैं. मदनी का यह दौरा और उनकी टिप्पणियां असम के शासन में भूमि अधिकारों, विस्थापन और उचित प्रक्रिया पर नए सिरे से छिड़ी बहस के बीच आई हैं.

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Author: News 7

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