गुंजी में आदि कैलाश परिक्रमा दौड़ में शामिल हुए धामी, अगले साल माणा पास से औली तक होगी 100 मील की अल्ट्रा दौड़

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा दौड़ के दूसरे संस्करण में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया और देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का उत्साहवर्धन किया। गुंजी पहुंचने पर रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की झलक देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा दौड़ केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि साहस, संकल्प, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की परीक्षा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कठिन रास्तों, विषम मौसम और कम ऑक्सीजन के बीच दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने प्रतिभागियों के साहस और उत्साह की सराहना की। आयोजन को सफल बनाने में सहयोग के लिए भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं जवानों की भी प्रशंसा की।

माणा पास से औली तक होगी 100 मील की दौड़

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’ आयोजित की जाएगी। यह दौड़ लगभग 5600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से शुरू होकर बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और हिमालयी क्षेत्र की साहसिक पर्यटन संभावनाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

साहसिक पर्यटन को मिल रही नई पहचान

धामी ने कहा कि वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा दौड़ के पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने हिस्सा लिया था। आयोजन की सफलता से आदि कैलाश क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आदि कैलाश क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो क्षेत्र के प्रति पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा दौड़ जैसे आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। इससे होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, परिवहन व्यवसायियों और होटल व खानपान से जुड़े लोगों को लाभ मिलता है। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन विकास का सीधा लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और सीमांत गांवों से पलायन रोकने में मदद मिले।

ट्रेकिंग से लेकर पर्वतारोहण तक गतिविधियों को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस वर्ष नीति घाटी में भी अल्ट्रा दौड़ का आयोजन किया गया। राज्य में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, नदी में नौकायन, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, पर्वतीय साइकिलिंग और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन का विस्तार किया जा रहा है।

कार्यक्रम में उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह नबियाल, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

News 7
Author: News 7

Leave a Comment

और पढ़ें

Orpheus Financial