उज्जैन : आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के एक बयान से फिर सियासी तूफान उठ गया है। शुक्रवार को उज्जैन में युवा धर्म संसद में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा “जब व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है और यह मानता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है। हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो उसे गलतफहमी हो जाती है। तो उसका उदय और अस्त निश्चित है। मनुष्य अहंकार में ऐसा मानता है कि सब ओर मेरी सत्ता चलती है, लेकिन ऐसा है नहीं।
उन्होंने कहा कि उदय हुआ है तो अस्त भी होगा। किसी को भ्रम नहीं रखना चाहिए कि सब उसके अनुसार चलता है। मनुष्य अपने अहंकार में सोचता है कि सत्ता उसकी मर्जी से चलती है, मगर ऐसा नहीं है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने युवा धर्म संसद में युवाओं को अहंकार से बचने की नसीहत भी दीकहा मोहन भागवत ने कहा कि आजकल युवाओं के धर्म से जुड़ने की बात कम ही सुनने को मिलती है। अगर हम धर्म की बात करते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह सब बुढ़ापे की बातें हैं। भगवद गीता, रामायण वगैरह रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के लिए हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। यह धर्म कम से कम अस्तित्व की शुरुआत से लेकर उसके अंत तक बना रहता है। चाहे आप इसमें विश्वास करें या न करें सब कुछ धर्म के अनुसार ही चलता है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में एक बार फिर सवाल उठने शुरू हो गए हैं । आखिरकार संघ प्रमुख किस पर निशाना साध रहे हैं? किसको नसीहत दे रहे हैं?









