नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में बनर्जी ने कहा कि इन सांसदों ने खुद को एक अलग समूह बताने के साथ-साथ नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) नामक पार्टी में शामिल होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा दल है जिसके बारे में किसी ने नहीं सुना था। बंगाल की जनता कभी इन्हें माफ नहीं करेगी।
उन्होंने संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) और सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का हवाला देते हुए इस विलय को पूरी तरह अवैध बताया। उनका कहना है कि मूल राजनीतिक दल का विलय नहीं हुआ है, इसलिए विधायी दल का यह अलग होना अमान्य है।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपना पक्ष स्पीकर के सामने रख दिया है और निर्णय उनके विवेक पर छोड़ दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा अध्यक्ष संविधान के नियमों के मुताबिक ही फैसला लेंगे। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) के दुरुपयोग के जरिए विपक्षी पार्टियों को तोड़ने का भी आरोप लगाया।
अभिषेक बनर्जी ने पिछले डेढ़ महीने के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में भी विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने कहा कि जिस तरह पार्टियों को तोड़ा जा रहा है, उससे साफ है कि संविधान को हर कीमत पर बदलने की कोशिश हो रही है। उन्हें जनता पर भरोसा नहीं है। उन्हें पता है कि अगर निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से मतदान हो तो बीजेपी कभी नहीं जीत सकती।









