महाराष्ट्र : मनोज जरांगे ने खत्म किया आंदोलन, मराठा आरक्षण पर बन गई बात

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मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को मराठा आरक्षण पर अपनी सहमति प्रदान कर दी है. इस फैसले के बाद मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने अपना आमरण अनशन तोड़ दिया. उन्होंने यह फैसला राज्य सरकार की कैबिनेट उप समिति के प्रस्ताव सामने आने के बाद किया है. इस समिति के प्रमुख राधाकृष्ण विखे पाटिल हैं.

उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्रराजे भोसले, जयकुमार गोरे और उदय सामंत ने राज्य सरकार की ओर से जारांगे की मांगों के अंतिम मसौदे के साथ उनसे मुलाकात की. मनोज जारंगे की मांग थी कि ‘हैदराबाद गजट’ को तुरंत लागू किया जाए. उपसमिति ने इसे मंज़ूरी दे दी है. जरांगे की आठ में से छह मांगें सरकार ने मान ली हैं.

उनकी मुख्य मांग मराठा समाज को कुनबी जाति में शामिल करने की थी. कुनबी जाति को पहले से ही ओबीसी का दर्जा प्राप्त है. इसके तहत अब मराठाओं को भी रिजर्वेशन मिल सकेगा. इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने आंदोलनकारियों से बुधवार सुबह तक आजाद मैदान खाली करने का आदेश दिया था. जरांगे और उनके समर्थक यहीं पर आंदोलन कर रहे थे।

आपको बता दें कि मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन 29 अगस्त से जारी था. पिछले 5 दिनों से मुंबई के आजाद मैदान और फोर्ट मरीन ड्राइव इलाके में डेरा डाले मराठा प्रदर्शनकारी अब अदालत के आदेश के बाद धीरे-धीरे इलाका खाली कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें मान लिए जाने पर मैदान में जश्न मनाया.

क्या है हैदराबाद गजट?

मराठवाड़ा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पहले हैदराबाद राज्य का हिस्सा था. सरकार ने जो ऑर्डर जारी किया है, उसके अनुसार पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य की अधिसूचनाएं जिन्हें अलग-अलग समय पर जारी किया गया था और जिनमें मराठा को कुनबी वर्ग के रूप में मान्यता दी गई थी, उन सूचियों को सत्यापन के लिए उपयोग किया जाएगा. अधिसूचनाएं – 1900, 1902, 1918, 1923, 1926, 1928 और 1948 में जारी हुईं थीं.

लंबे समय से आंदोलन कर रहे जरांगे

मराठा रिजर्वेशन को लेकर मनोज जरांगे लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने 2021 और 2023 में भी आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था. 2021 में उन्होंने 90 दिनों तक सरकार पर दबाव बनाए रखा था. उसके बाद 2023 में भी बड़ा आंदोलन किया था. बीच-बीच में भी जरांगे ने कई मंचों से मराठा आरक्षण को लेकर अपनी आवाजें बुलंद की थीं.

महाराष्ट्र में ओबीसी को 19 फीसदी आरक्षण है. इसके बाद एससी को 13 फीसदी, एसटी को सात फीसदी, सामाजिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसदी, घुमंतू जनजाति-2 को 3.5 फीसदी, घुमंतू जनजाति -3 को दो फीसदी और विमुक्त जाति को तीन फीसदी आरक्षण मिलता है.

अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार मनोज जरांगे ने सरकार से अपील की है कि वह उन आंदोलनकारियों के खिलाफ केस हटा लें, जिनके खिलाफ पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं. उन्होंने आंदोलनकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है. उन्हें आश्वासन दिया गया है कि सरकार मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी मामले सितंबर के अंत तक वापस ले लेगी. मराठा आंदोलन में खुद को बलिदान करने वालों के परिवारों को अब तक 15 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं.

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Author: News 7

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