उत्तराखंड सरकार हरिद्वार में राज्य की पहली मेडिसिटी बनाने जा रही है। पहले चरण में मेडिकल कॉलेज के निर्माण के बाद दूसरे चरण में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नर्सिंग कॉलेज पैरामेडिकल कॉलेज और वैलनेस केंद्र बनाए जाएंगे। इस परियोजना से लगभग 5000 रोजगार और प्रति वर्ष 6500 करोड़ रुपये का आर्थिक प्रभाव पड़ने का अनुमान है। हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
प्रदेश सरकार अब हरिद्वार में राज्य की पहली मेडिसिटी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत हरिद्वार में नवनिर्मित मेडिकल कालेज का संचालन सुनिश्चित करने के बाद दूसरे चरण में इसे बनाया जाना प्रस्तावित है।
इसमें मेडिकल कालेज के साथ ही सुपर स्पेशलिटी अस्तपाल, नर्सिंग कालेज, पैरामेडिकल कालेज और वैलनेस केंद्र बनाया जाएगा। सशक्त उत्तराखंड के तहत स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में आगे कदम बढ़ा रहा है।
प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की सुधार में लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस कड़ी में प्रदेश सरकार ने हरिद्वार मेडिकल कालेज का भी निर्माण कराया है। इस मेडिकल कालेज को पीपीपी मोड पर चलाया जाना प्रस्तावित था।
गत वर्ष फीस को लेकर उठे विवाद के बाद सरकार ने इसका संचालन अपने हाथों में ले लिया था। इस वर्ष भी इसमें 100 सीटों के लिए एडमिशन होने हैं। अब इसे पीपीपी मोड पर किस प्रकार चलाया जाए इसे लेकर विभाग में मंथन चल रहा है।
हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग को लेकर हुई बैठक में इसे गेमचेंजर योजना के रूप में शामिल किया गया है। बताया गया कि इसे रेवेन्यू शेयरिंग तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
इस योजना के दूसरे चरण में मेडिकल कालेज का दायरा बढ़ाते हुए इसे मेडिसिटी के रूप में बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए 15 वर्ष की समयसीमा तय की गई है।
इसमें सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, नर्सिंग कालेज, पैरामेडिकल कालेज व वेलनेस केंद्र के निर्माण से तकरीबन पांच हजार रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। साथ ही इसमें 6500 करोड़ प्रति वर्ष का आर्थिक प्रभाव पडऩे की संभावना जताई गई है।










