नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े उन फैसलों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित करने की मांग की गई है जो कथिततौर पर बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे।
यह याचिका एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के SIR और फॉर्म 6 में बदलावों से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर लिखित रूप में अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल या न्यायिक जांच आयोग के गठन की मांग की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की पूरी सहमति के बिना शुरू किए गए, मंजूर किए गए या लागू किए गए सभी फैसलों, दिशा-निर्देशों, आदेशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरुआत से ही अमान्य घोषित किया जाए।










