भारतीय जनता पार्टी के नेता धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश की गई, जिसके कारण उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह पद मेरे लिए जरूरी नहीं था।
उन्होंने कहा कि Gen-Z हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। तब मुझे कोई पर्सनल दिक्कत नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया था और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे पैदा होते हैं। पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए। उनकी ख्वाहिशें हैं, और वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे।









