आज मंगलवार को राज्यसभा में वंदेमातरम को लेकर चर्चा की गई. सत्ता पक्ष की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह ने शुरुआत की. उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह पर राज्यसभा में हुई खास चर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तौर पर तय की गई थी. उन्होंने कहा कि आलोचकों को राष्ट्रीय गीत की विरासत और अहमियत के बारे में ‘नए सिरे से सोचनेट की जरूरत है.
वे वंदे मातरम के महिमामंडन को पश्चिम बंगाल चुनाव से जोड़ना चाहते हैं. मुझे लगता है कि उन्हें अपनी समझ पर फिर से सोचने की जरूरत है. उन्होंने इस गाने को ‘एक अमर रचना बताया जो भारत माता के प्रति भक्ति और कर्तव्य जगाती है’. शाह ने आगे कहा कि जो लोग चर्चा के मकसद पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें ‘नए सिरे से, साफ-साफ सोचना चाहिए.’
इस मौके को ऐतिहासिक बताते हुए शाह ने कहा कि इस चर्चा से युवाओं के लिए राष्ट्रीय गीत की भूमिका की समझ और गहरी होगी. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को भारत की आजादी में वंदे मातरम के योगदान, इसे बनाने की प्रेरणा देने वाली देशभक्ति और 2047 में एक विकसित भारत बनाने में यह भावना कैसे मदद करेगी, यह जानना चाहिए. शाह ने आगे कहा कि वंदे मातरम की भावना भारत के सैनिकों के दिलों में जिंदा है. उन्होंने कहा कि जब देश का कोई जवान अपनी जान कुर्बान करता है, तो उसके होठों पर सिर्फ वंदे मातरम ही होता है. ये चर्चाएं वंदे मातरम की विरासत और 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद के खास फोकस का हिस्सा हैं.










