उत्तर प्रदेश:आख़िरकार वो लम्हा आ ही गया जिसका इंतज़ार आज़म खान बड़ी बेसब्री से कर रहे थे। आज रामपुर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता आजम खां की करीब दो घंटे तक चली बैठक ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। कयास लगाए जा रहे है कि इस मुलाक़ात से दोनों के बीच गिले शिकवे दूर हो गये हैं ।
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खां समाजवादी पार्टी के सबसे पुराने और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ हुई यह बैठक सकारात्मक रही। यह भी स्पष्ट किया कि आगे भी इस प्रकार की मुलाकातों और बैठकों का दौर जारी रहेगा, ताकि पार्टी में संवाद और रणनीति को और मजबूत किया जा सके।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि आज में आजम खान का हालचाल लेने आया था, क्योंकि मैं जेल नहीं पहुंच पाया था. लगातार हम लोग मिलते भी रहेंगे. पीडीए के लोग कहीं बैठे हों अपमानित जरूर होते हैं. ये बात मैंने विधानसभा में भी एक बार कही थी. जो पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, मुसलमान भाई, आदिवासी पीडीए परिवार है, वह एक सूत्र में अपनी पीड़ा के कारण बंधा है.
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने आजम खां और उनके परिवार पर लगे मामलों को लेकर कई गंभीर दावे और आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आजम खां के परिवार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार इस परिवार पर इतने मुकदमे दर्ज करवा चुकी है कि इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाईयों से पीडीए समुदाय के लोगों में नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि शायद देश के इतिहास में पॉलिटिकल करियर के इतिहास में पता नहीं भारतीय जनता पार्टी कौन सा वल्ड्र रिकॉर्ड बनाना चाहती है, आजम खान साहब पर सबसे ज्यादा केस लगे हैं. उनके ऊपर गलत केस लगे. आजम, उनकी पत्नी और पूरे परिवार पर सरकार ने झूठे मुकदमे लगाए हैं. आजम और उनके परिवार जैसी तकलीफ किसी को भी नहीं पहुंचाई गई.
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि पार्टी की रणनीति स्पष्ट है और समाजवादी पार्टी आगे भी अपने पुराने और अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में कार्य करेगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति केवल व्यक्तिगत और परिवार विशेष को निशाना बनाने तक सीमित हो गई है।
जबकि जनता की समस्याओं और विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस मुलाकात और बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है। सपा कार्यकर्ता इसे पार्टी के लिए सकारात्मक संदेश मान रहे हैं और कई लोग इसे आगामी चुनावी रणनीति का संकेत भी बता रहे हैं।










