पटना/दरभंगा: बिहार में जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का दूसरा दिन है. पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हड़ताल का असर देखा जा रहा है. ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद है, जिसके कारण मरीज और उनके परिजन घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद निराश होकर लौटने को मजबूर हुए. हड़ताल का असर इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी विभागों में देखा गया. वहीं कई मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा.
जूनियर डॉक्टरों की 6 सूत्री मांग: जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल के समर्थन में 6 सूत्री मांगें रखी हैं. इनमें अस्पताल परिसर में सुरक्षा के लिए स्थायी पुलिस बल की तैनाती, बेहतर आवास व्यवस्था, वेतन व भत्तों में वृद्धि, आधुनिक लैब व उपकरणों की उपलब्धता, सीनियर डॉक्टरों की नियमित नियुक्ति और ड्यूटी के घंटों का नियमन शामिल है. डॉक्टरों का कहना है कि इन मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
क्या है जूनियर डॉक्टरों की मांग?
- सुरक्षा की गारंटी – अस्पताल परिसर में बार-बार हो रही अभद्रता और मारपीट की घटनाओं से बचाव के लिए स्थायी पुलिस बल की तैनाती.
- होस्टल और आवास की सुविधा- जूनियर डॉक्टरों को रहने और पढ़ाई के अनुकूल माहौल मिले, इसके लिए बेहतर आवास व्यवस्था.
- मानदेय और भत्ता वृद्धि – लंबे समय से पेंडिंग पड़ी वेतन और भत्ता वृद्धि की मांग को पूरा किया जाए.
- अकादमिक सुधार – पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए आधुनिक लैब और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं.
- नियमित पदस्थापना – विभागों में पर्याप्त संख्या में सीनियर डॉक्टर और फैकल्टी की तैनाती की जाए.
- कार्य के घंटे और सुविधाएं – ड्यूटी के घंटों को नियमित किया जाए और कामकाज की परिस्थितियों में सुधार हो.










