देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपए की हेराफेरी हुई और सालों तक विभाग के अधिकारियों को कानों कान खबर नहीं लगी. यकीन करना मुश्किल है लेकिन विभागीय जांच रिपोर्ट कुछ इसी तरफ इशारा कर रही है. हालांकि अब शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने इस मामले में एसआईटी को आदेश दिए हैं.
दरअसल, उत्तराखंड शिक्षा विभाग में एक कर्मचारी द्वारा तीन करोड़ से ज्यादा का गबन करने का मामला सामने आया है. हैरत की बात यह है कि विभागीय जांच में इसी कर्मचारी को गबन का मास्टरमाइंड माना गया है, जबकि यह कर्मचारी विभाग में आउटसोर्स पर तैनात है. इससे भी बड़ी बात यह है कि एक अकेला कर्मचारी करोड़ों का गबन करता है और विभाग के अधिकारियों को इसकी कानों कान खबर नहीं होती.
यह मामला प्रधानमंत्री पोषण योजना और शक्ति निर्माण योजना से जुड़ा हुआ है. जिसमें एक उपनल कर्मचारी को प्रत्यक्ष रूप से दोषी पाया गया है. इसको लेकर दो महीने पहले प्रधानमंत्री पोषण प्रकोष्ठ देहरादून में वित्तीय अनियमितता की शिकायत आई थी. इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच के आदेश दिए गए थे.
हैरत की बात यह है कि विभागीय जांच में उपनल कर्मचारी द्वारा सरकारी धन की हेराफेरी के लिए दोषी पाया गया, लेकिन इसमें किसी भी विभागीय कर्मचारी या बड़े अफसर का नाम सामने नहीं आया. देहरादून में 3 करोड़ 18 लाख रुपए के सरकारी के गबन का यह मामला इसलिए भी चर्चाओं में है, क्योंकि एक छोटे से कर्मचारी ने जांच के अनुसार इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया.
इस मामले में अपर निदेशक गढ़वाल मंडल की अध्यक्षता में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी गई, जिसमें प्रथम दृष्ट्या गबन का मामला पाया गया था और जांच में उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश भी की गई थी. इसी को देखते हुए शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने अब मामले में एसआईटी जांच की संस्तुति कर दी है. हालांकि इस मामले में बड़े अधिकारियों की लापरवाही की बात कही गई है, जिन पर भी कार्रवाई करने का दावा किया जा रहा है.
साल 2023-24 से लेकर साल 2025-26 की अवधि के दौरान 3 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा की धनराशि की हेरा फेरी हुई है, जिसमें सरकारी धन को ऑनलाइन अज्ञात लोगों के खातों में ट्रांसफर किया गया. बड़ी बात यह है कि इस समयावधि के दौरान शिक्षा विभाग में अलग-अलग दो से तीन जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक में बदले गए, लेकिन बड़े अधिकारियों को इतने बड़े घपले की कानों कान खबर नहीं हुई. हालांकि अब एसआईटी जांच के आदेश किए गए हैं, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि क्या वाकई बड़े अधिकारियों को इतने सालों तक करोड़ों के घोटाले की कोई जानकारी नहीं थी.
उधर शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि इस मामले की एसआईटी जांच के दौरान सभी दोषियों को चिन्हित कर लिया जाएगा. इसके बाद ऐसे कर्मचारी और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि विभाग ने यह माना है कि उपनल कर्मचारी अकेले इतने बड़े घोटाले को अंजाम देता रहा इसके बावजूद यदि बड़े अफसर को इसकी खबर नहीं लगी, तो यह बड़ी लापरवाही है. ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी उत्तराखंड सरकारी सेवक अधिनियम के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.










