देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना एक दिसंबर 2026 से शुरू होगी। विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में फरवरी 2027 से पहले जनगणना कराने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार प्रदेश में 16 से 30 नवंबर तक लोगों को स्वयं अपनी गणना दर्ज कराने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद एक दिसंबर से चार जनवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर आबादी की गणना करेंगे।
प्रदेश में हिम आच्छादित क्षेत्रों की जनगणना पहले ही शुरू हो चुकी है। चार जिलों के 131 गांवों और तीन शहरों में यह प्रक्रिया एक सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में आबादी की गणना की तैयारियां तेज की जाएंगी। मकान सूचीकरण और मकान गणना के पहले चरण के आधार पर प्रदेश की अनुमानित आबादी करीब 1.27 करोड़ सामने आई है।
जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार इस बार प्रगणकों को पहले की तुलना में अधिक जानकारी जुटानी होगी। सवालों की संख्या 33 से बढ़ाकर 40 कर दी गई है। एक परिवार की गणना में करीब 45 मिनट से एक घंटे तक लगने की संभावना है। इसी वजह से आबादी की गणना के लिए 35 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
चार जनवरी को मुख्य गणना पूरी होने के बाद पांच से नौ जनवरी तक पुनरीक्षण दौर चलेगा। इस दौरान प्रगणक दोबारा घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की संख्या में हुए बदलाव की जानकारी दर्ज करेंगे। जनगणना की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की मध्यरात्रि मानी जाएगी।
जनगणना निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार मकान सूचीकरण के बाद अब जनगणना खंडों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसके चलते प्रदेश में गणना खंडों की संख्या करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही प्रगणकों और अन्य कर्मचारियों की संख्या में भी इसी अनुपात में वृद्धि हो सकती है।
मकान सूचीकरण के दौरान करीब 20 हजार प्रगणक और 3500 पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे। तीन हजार रिजर्व कर्मचारी भी रखे गए थे। अब आबादी की गणना के दौरान प्रगणक, पर्यवेक्षक और रिजर्व कर्मचारियों समेत करीब 35 हजार कार्मिकों की तैनाती की संभावना है। कर्मचारियों की जिलावार व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
इसके अलावा उपलब्ध होने पर मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और वाहन चलाने के लाइसेंस से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
सैन्य और अर्धसैनिक बलों के जवानों की जनगणना के लिए अलग व्यवस्था की गई है। संबंधित संस्थानों के स्तर पर प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिन्हें जनगणना निदेशालय की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जवानों की गणना गोपनीयता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऑफलाइन माध्यम से की जाएगी और बाद में सुरक्षित तरीके से आंकड़े पोर्टल पर दर्ज किए जाएंगे।









