नई दिल्ली : पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बात पर सहमत हुए कि “मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।” उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की हालिया कोशिशों को और मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मुलाकात की और लगभग 50 मिनट तक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत हुई।
सीमा पर शांति को रिश्तों के लिए अहम बताते हुए मोदी ने जोर दिया कि “सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास का एक अनिवार्य आधार है।“विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री ने “सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और आपसी समझ का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और आपसी सहमति वाले समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई। करीब सात साल में पहली बार भारत दौरे पर आए शी के हवाले से चीनी मीडिया ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों में हुई प्रगति को “संजोकर रखना” चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे से सीख सकते हैं, “आपसी सहयोग कर सकते हैं, साझा सफलता हासिल कर सकते हैं और मिलकर विकास कर सकते हैं।”
दोनों देश सीमा पर तनाव को संभालते हुए आपसी भरोसा बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैंपीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन के आपसी संबंध तीन पारस्परिक सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सबसे ज़रूरी आधार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को तीन आपसी बातों-आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित-को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए।









