नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट से उस छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में स्पष्टीकरण मांगेगा, जिसने कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया। वकील ने कहा कि छात्रों पर ‘‘प्रयोग’’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत था. हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया।
सीजेआई ने कहा, ‘‘आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है। हमने स्पष्ट आदेश पारित किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि हमने पहले ही किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था।’’
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया था।









