बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा को झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

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प्रयागराज: बरेली दंगा मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान को झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। तौकीर रजा के साथ डॉ नफीस को भी जमानत देने से कोर्ट ने इनकार कर दिया।

हिंसा से जुड़ी 63 याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। तौकीर रजा और डॉ नफीस के अलावा सभी आरोपियों को जमानत मिल गई है। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने आदेश दिया है।

मौलाना तौकीर रज़ा पर बरेली के कोतवाली थाने में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा सात तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। वह 27 सितंबर 2025 से जेल में हैं।  ट्रायल कोर्ट ने भी 10 नवंबर 2025 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

अदालत ने कहा कि घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों के आह्वान पर पहुंचने के लिए उन्हें धन्यवाद देना और उनके कृत्यों की सराहना करना भी स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने विशेष रूप से उस नारे पर टिप्पणी की, जिसका उल्लेख अभियोजन ने किया था। कोर्ट ने कहा कि “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा” जैसे नारे को कानून के अधिकार को चुनौती देने वाला माना जा सकता है। अदालत ने इसे देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती तथा लोगों को सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने वाला बताया।

कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के नारे की तुलना धार्मिक सम्मान व्यक्त करने वाले “नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर”, “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल”, “जय श्री राम” या “हर हर महादेव” जैसे नारों से नहीं की जा सकती।

बता दें कि बरेली में 26 सितंबर 2025 को हिंसा हुई थी। अभियोजन के मुताबिक, भीड़ के जुटने, पुलिस के साथ टकराव, पथराव और पेट्रोल बम फेंके जाने की घटनाएं हुई थीं। मामले में मौलाना तौकीर रजा को प्रमुख आरोपी बनाया गया है।

News 7
Author: News 7

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