दरभंगा : मिथिला में एक कहावत बड़ा प्रसिद्ध है, ‘पग पग पोखर माछ मखान, ई थिक मिथिलाक पहचान’, जिसका अर्थ है कि यहां जलाशय थोड़े-थोड़े दूर पर मिल जाता है, जिसमें मछली और मखाने का उत्पादन वृहत पैमाने पर किया जाता है. वैसे तो मखाने का उत्पादन बिहार के कई जिलों में होता है, पर मिथिलांचल इसका गढ़ है.
मखाने के माला में पिरोए गए पीएम : ऐसे में पीएम नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को पूर्णिया से बिहार में मखाना बोर्ड का उद्घाटन किया. वैसे तो इसकी घोषणा केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में किया था. पर इसका विधिवत उद्घाटन आज किया गया. इस मौके पर पीएम ने मखाने को लेकर अपनी बात रखी. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने माखाने का बड़ा सा माला भी पीएम को पहनाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार के किसानों के लिए आय का एक साधन मखाने की खेती भी रहा है. लेकिन, पिछली सरकारों में मखाना और मखाना किसानों की भी उपेक्षा की. इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष भी किया. पीएम ने कहा कि, मैं दावे से कह सकता हूं कि ये जो आजकल यहां आकर चक्कर काटते हैं, उन्होंने मेरे आने से पहले मखाना का नाम भी नहीं सुना होगा.
”ये हमारी सरकार है जिसने मखाना को प्राथमिकता दी है. मैंने बिहार के लोगों से राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन का वादा किया था. केन्द्र सरकार ने कल ही राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. किसानों को मखाना की अच्छी कीमत मिले, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड इसके लिए निरंतर काम करेगा.”– नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
मखाना और बिहार : अगर गौर से देखें तो पिछला दशक मखाना की खेती करने वालों के लिए असाधारण रूप से अनुकूल रहा है, क्योंकि इसके पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों के कारण इसकी मांग दुनिया भर में फैल रही है. आंकड़ों के अनुसार भारत, विश्व के लगभग 85% मखाना की आपूर्ति करता है. वैसे चीन और पाकिस्तान भी फॉक्सनट के वैश्विक उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
11 जिलों में होता है उत्पादन : सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के मखाने का उत्पादन 85 प्रतिशत बिहार में ही होता है. ऐसे में हम आपको ग्राफिक्स के जरिए बताते हैं कि कैसे कोसी-सीमांचल-मिथिलाचंल इसका गढ़ बना हुआ है. मतलब 11 जिले के लाखों लोग इससे जुड़े हुए हैं.
5000 करोड़ का कारोबार : चूंकि देश-विदेश में मखाने की डिमांड बढ़ी तो ऐसे में इसका उत्पादन भी पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ा है. एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार 35 हजार हेक्टेयर में मखाने की खेती होती है. इससे लगभग 5000 करोड़ रुपये का बाजार होता है.










