नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त महीने के आखिरी रविवार को मन की बात की. यह उनका 125वां एपिसोड है. इस दौरान उन्होंने कहा मॉनसून के दौरान भारी बारिश से तबाही का जिक्र किया. इस दौरान हुए नुकसान की बात की. साथ ही उन्होंने इस आपदा की घड़ी में बदलते भारत की तस्वीर भी दिखाई.
पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में इस आपदा की घड़ी में कुछ अच्छा भी देखने को मिला. बहुत से लोगों ने इन पर ध्यान नहीं दिया. लेकिन आपको उन उपलब्धियों के बारे में जानकर खुशी होगी. पुलवामा में एक स्टेडियम में डे-नाइट क्रिकेट मैच खेला गया जो बदलते भारत की तस्वीर है. पहले ये होना असंभव था, लेकिन अब देश बदल रहा है. यह मैच ‘रॉयल प्रीमियर लीग’ का एक हिस्सा है जिसमें जम्मू-कश्मीर की विभिन्न टीमें भाग ले रही हैं.
उन्होंने कहा कि इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाएं देश की परीक्षा ले रही हैं. पिछले कुछ हफ्तों में हमने बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही देखी है. कई घर तबाह हो गए, खेत जलमग्न हो गए, पूरे परिवार बर्बाद हो गए. पानी के लगातार बहाव ने पुल-सड़कें बहा दीं और लोगों की जान खतरे में पड़ गई. इन घटनाओं ने हर भारतीय को दुखी किया है. जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनका दर्द हम सभी साझा करते हैं.
पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘जहां भी संकट आया, हमारे एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवान और अन्य सुरक्षा बलों ने लोगों को बचाने के लिए दिन-रात काम किया. जवानों ने तकनीक की भी मदद ली. थर्मल कैमरा, लाइव डिटेक्टर, खोजी कुत्तों और ड्रोन सर्विलांस की मदद से राहत कार्यों में तेजी लाने की कोशिश की गई. इस दौरान हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुंचाई गई और घायलों को एयरलिफ्ट किया गया.
आपदा के समय सशस्त्र बल मदद के लिए आगे आए. स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों, प्रशासन – सभी ने संकट की इस घड़ी में हर संभव प्रयास किया. मैं ऐसे हर नागरिक का हृदय से धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस कठिन समय में मानवता को प्राथमिकता दी.’
स्पोर्ट्स को लेकर पीएम मोदी ने कहा,’देश का पहला ‘खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल’ लोगों का ध्यान खींचा. वह भी श्रीनगर की डल झील में आयोजित किया गया. सचमुच इस तरह के महोत्सव की मेजबानी के लिए यह एक विशेष स्थान है।
इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जल खेलों को और अधिक लोकप्रिय बनाना है. पूरे भारत से 800 से अधिक एथलीटों ने इसमें भाग लिया. महिला एथलीट भी पीछे नहीं थीं, उनकी भागीदारी पुरुषों के लगभग बराबर थी. मैं सभी प्रतिभागियों को बधाई देना चाहता हूं. मध्य प्रदेश को विशेष बधाई, जिसने सबसे अधिक पदक जीते, उसके बाद हरियाणा और ओडिशा का स्थान रहा.’










