नई दिल्ली: सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने के हादसे ने दिल्ली में जर्जर इमारतों और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कल हुए हादसे में मृतकों की संख्या 7 पहुंच गई है। बचाव दल अभी भी मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
इमारत करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी थी। इमारत में बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी आवास के तौर पर किया जा रहा था। घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक इमारत का हिस्सा ढह गया और वहां मौजूद लोग मलबे में दब गए।
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। MCD के आदेश के मुताबिक, सत्य निकेतन स्थित भवन संख्या-13 को पहले ही जर्जर और खतरनाक घोषित किया जा चुका था। निगम ने संपत्ति मालिक/कब्जाधारी को इसे तीन दिन के भीतर ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। MCD के आदेश में कहा गया था कि भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर और खतरनाक है। इससे भवन में रहने वाले लोगों के साथ-साथ वहां आने-जाने वाले लोगों और आसपास के क्षेत्र में मौजूद लोगों की सुरक्षा को खतरा है। इसी आधार पर दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348 और धारा 491 के तहत कार्रवाई करते हुए भवन को तीन दिनों के भीतर गिराने का आदेश जारी किया गया था।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लिया। प्रारंभिक आकलन के आधार पर मुख्यमंत्री ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।साथ ही इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी इस गंभीर हादसे के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसकी पूरी जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के सख्त प्रावधानों के तहत कार्रवाई होगी।
दिल्ली पुलिस ने फरार इमारत मालिक हरिराम बंसल की तलाश के लिए 10 टीमें गठित की हैं और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी कर दिया है।








