नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी को 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक विरोध मार्च करने से रोकने से इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने भरोसा जताया कि विरोध शांतिपूर्ण रहेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना केंद्र और दिल्ली सरकार तथा पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अभी ऐसी कोई मजबूर करने वाली हालत नहीं है जिससे यह माना जा सके कि कुछ गलत होगा…”।
एक आवेदक का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील रिजवान अहमद ने तर्क दिया, “मांग क्या है, क्या यह जरूरी है? पुलिस एफआईआर में नामजद लोगों को गिरफ्तार करने के लिए उन पर छापे मार रही है।जवाब है नहीं। तो, कॉकरोच जनता पार्टी जो भी पूछ रही है, वह उनके लिए काम का हो सकता है…लेकिन क्या वे ब्रिक्स समिट खत्म होने का 10 दिन इंतजार नहीं कर सकते और फिर सरकार को अप्लाई नहीं कर सकते.
अगर सरकार इजाजत नहीं देती है, तो वे तत्काल उल्लेख के लिए सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं…” सीजेआई ने बताया कि इसमें दो मुद्दे शामिल हैं: पहला कानून और व्यवस्था, और दूसरा यह कि यह एक पॉलिसी मुद्दा है।
सीजेआई ने कहा कि कोर्ट अभी यह मानकर चल रहा है कि हर कोई बहुत जिम्मेदारी से और शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से काम करेगा और व्यवहार करेगा। सीजेआई ने कहा, “अभी ऐसी कोई मजबूर करने वाली परिस्थितियां नहीं हैं जिससे यह माना जा सके कि कुछ भी गलत होगा…”।
उन्होंने पीठ से इस मामले पर नोटिस जारी करने और 3 या 4 सितंबर को सुनवाई करने की अपील की। पीठ ने कहा कि इस मामले पर आखिर में पुलिस अधिकारियों को ही विचार करना होगा और वह इस आवेदन को मेन केस के साथ टैग कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ये ऐसे मुद्दे हैं जिनका ध्यान कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों को रखना है।” पीठ ने कहा, “कानून और व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है।वे कहेंगे कि क्या कानूनी है या गैर-कानूनी, या क्या जायज है…”।
सीजेआई ने कहा, “हम सभी पहलुओं पर गौर नहीं कर सकते। हम हर चीज पर कमेंट नहीं करेंगे। कृपया हमारी बनाई हाई-पावर्ड कमेटी के पास जाएं।”









